एलएसी के अग्रिम मोर्चे से एक साथ हट रहीं दोनों देशों की सेनाएं, चीन ने भी बयान जारी कर लगाई मुहर

एलएसी के अग्रिम मोर्चे से एक साथ हट रहीं दोनों देशों की सेनाएं, चीन ने भी बयान जारी कर लगाई मुहर

पूर्वी लद्दाख में एलएसी के अग्रिम मोर्चे पर तैनात चीन और भारत के सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया सुगमता से जारी है। चीन ने भी इस पर मुहर लगा दी है। चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता एवं वरिष्ठ कर्नल वु कियान (Colonel Wu Qian) ने बृहस्पतिवार को कहा कि एलएसी के अग्रिम मोर्चे पर तैनात चीन और भारत की सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया जारी है। उम्मीद है कि भारत और चीन मिलकर लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रयास करेंगे।

चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वु कियान ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के दक्षिणी एवं उत्तरी किनारों पर अग्रिम मोर्चे पर तैनात भारत और की सेनाओं ने एक साथ व्यवस्थित तरीके से पीछे हटना शुरू किया है। वहीं चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग (Hua Chunying) ने भी कहा कि सैनिकों के वापसी की प्रक्रिया सुगमता से चल रही है। हमें उम्मीद है कि दोनों पक्ष लक्ष्य को हासिल करने के लिए सम्मिलित प्रयास करेंगे।

सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया में हुई प्रगति के बारे में पूछे जाने पर हुआ ने कहा कि कई दौर की वार्ताओं में बनी सहमति के आधार पर अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों ने दोनों ही ओर से एक साथ और व्यवस्थित तरीके से पीछे हटना शुरू कर दिया है। हमें उम्मीद है कि दोनों पक्ष सैनिकों की पूर्ण वापसी की प्रक्रिया को आसानी से सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों के बीच बनी सहमति और समझौतों को ध्यान में रखेंगे। सैनिकों की वापसी की समय सीमा पर उन्होंने कहा कि इसकी कोई निश्चित समय सीमा मैं नहीं बता सकती हूं... 

उल्‍लेखनीय है कि पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर बीते नौ महीनों से जारी गतिरोध के बाद दोनों देशों की सेनाएं पैंगोंग झील के उत्तरी एवं दक्षिणी किनारों से पीछे हटने के समझौते पर पहुंची हैं। यह समझौता दोनों देशों के अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों के चरणबद्ध तरीकों से पीछे हटने की बात करता है। भारतीय सेना ने कुछ तस्वीरें जारी की हैं जिनमें पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग सो (झील) के आसपास के इलाकों से चीनी सेना अपने बंकर, शिविर और अन्य सुविधाओं को नष्ट करती नजर आ रही है। 


चीन ने जैक मा की कंपनी अलीबाबा पर कसा शिकंजा, लगाया 20 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना

चीन ने जैक मा की कंपनी अलीबाबा पर कसा शिकंजा, लगाया 20 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना

कई तरह की पाबंदियां लगाने के बाद अब चीन सरकार ने जैक मा की कंपनी अलीबाबा के खिलाफ एकाधिकार विरोधी नियमों के उल्लंघन के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। बीजिंग ने अलीबाबा समूह पर 2.8 अरब डॉलर (20 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा) का जुर्माना लगाया है। दरअसल, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अलीबाबा सहित चीन की इंटरनेट कंपनियों के बढ़ते प्रभुत्व को लेकर चिंतित है। उसकी चिंता इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि अब ये कंपनियां वित्त, स्वास्थ्य सेवाओं और दूसरे संवेदनशील क्षेत्र में अपना व्यापार फैला रही हैं। पार्टी का कहना है कि उसकी इस वर्ष की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर तकनीकी कंपनियों के एकाधिकार को खत्म करना है।

चीन के स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन फॉर मार्केट रेगुलेशन के मुताबिक अलीबाबा समूह ने एकाधिकार विरोधी नियमों का उल्लंघन किया है। साथ ही बाजार में अपनी साख का भी दुरुपयोग किया है। इसलिए कंपनी के खिलाफ 2.8 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माने की यह राशि 2019 में अलीबाबा द्वारा कमाए गए राजस्व के लगभग चार फीसद के बराबर है। अलीबाबा पर लगाया गया जुर्माना वर्ष 2015 में क्वालकॉम इंक द्वारा दिए गए जुर्माने से दोगुना है।

उधर, कंपनी ने कहा है कि वह सोमवार सुबह जुर्माने पर चर्चा के लिए हांगकांग में एक कांफ्रेंस बुलाएगी। अलीबाबा ने इस फैसले के खिलाफ कोई नाराजगी नहीं जताई है। कंपनी ने कहा, 'अलीबाबा ईमानदारी के साथ जुर्माना स्वीकार करता है और दृढ़ संकल्प होकर इसका अनुपालन सुनिश्चित करेगा। समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए, अलीबाबा कानून के अनुसार काम करेगा। शनिवार को सरकारी समाचार पत्र पीपुल्स डेली में लिखे एक विचार संपादकीय में कहा गया है कि सरकार आर्थिक और सामाजिक विकास में इंटरनेट कंपनियों की भूमिका से भलीभांति परिचित है। जुर्माने का मतलब यह कतई नहीं है कि तकनीकी कंपनियों को लेकर सरकार ने अपनी नीति में कोई बदलाव किया है। इंटरनेट कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल तैयार हो, इसीलिए यह जुर्माना लगाया गया है।


कुछ दिनों पहले किया था हांगकांग के सबसे पुराने अखबार का अधिग्रहण

अलीबाबा ने हांगकांग के 118 वर्ष पुराने समाचार पत्र साउथ चाइना मार्निग पोस्ट का अधिग्रहण करके मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने चीन की मीडिया कंपनियों जैसे न्यूज वेबसाइट 36केआर, सरकारी स्वामित्व वाले शंघाई मीडिया गु्रप, चीन का ट्विटर जैसा प्लेटफार्म वीबो और दूसरे डिजिटल और प्रिंट न्यूज आउटलेट में हिस्सेदारी खरीदी थी। इससे नाराज चीन सरकार ने पिछले महीने ही अलीबाबा से मीडिया कंपनियों में हिस्सेदारी खत्म करने को कहा था।


सरकार के साथ कुछ ऐसे बढ़ा विवाद

जैक मा ने गत वर्ष अक्टूबर में शंघाई में दिए एक भाषण में देश के वित्तीय नियामकों और सरकारी स्वामित्व वाले बैंकों की आलोचना की थी। उन्होंने सिस्टम में सुधारों की मांग करते हुए वैश्विक बैंकिंग नियामक को 'बूढ़े लोगों का क्लब' बताया था। उनकी ये आलोचना चीन सरकार को नागवार गुजरी थी और उसने नवंबर में आने वाले एंट ग्रुप के 37 बिलियन डॉलर के आइपीओ पर रोक लगा दी थी। सरकार की आलोचना के बाद लगभग दो महीने तक जैक मा सार्वजनिक तौर पर दिखाई तक नहीं पड़े थे। उनके बारे में रहस्य तब गहरा गया था जब वे अपने टैलेंट शो अफ्रीका के बिजनेस हीरो के फाइनल एपिसोड में भी नहीं दिखाई दिए। मा की जगह इस एपिसोड में अलीबाबा के एक अधिकारी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। इसके बाद दुनिया भर में जैक मा के लापता होने की चर्चा की गई। इसके बाद जैकमा एक वीडियो कार्यक्रम में नजर आए।


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