लॉकडाउन के दौरान क्रिएटिविटी बनाए रखने के लिए वर्क फ्रॉम होम करने वालों को ये करना चाहिए

लॉकडाउन के दौरान क्रिएटिविटी बनाए रखने के लिए वर्क फ्रॉम होम करने वालों को ये करना चाहिए

COVID-19 महामारी से पूरी दुनिया में प्रलय जैसी स्थिति है। दिन व दिन संकट गहराता जा रहा है। कुछ देशों को छोड़कर सभी देशों में लॉक डाउन है। बच्चे, बूढ़े, स्त्री-पुरुष सभी अपने घरों में रहने को मजबूर हैं। कई कंपनियों ने अपने इंप्लॉय को वर्क फ्रॉम होम का विकल्प दिया है। ऐसे में लोग घर से ही काम कर रहे हैं। हालांकि, वर्क फ्रॉम होम करने से क्रिएटिविटी पर बैड इम्पैक्ट पड़ता है। अगर लॉक डाउन में आपकी क्रिएटिविटी भी खो रही है तो इन टिप्स को अपनाकर आप अपनी क्रिएटिविटी को बनाए रख सकते हैं।

कोशिश जारी रखें

कई बार ऐसा होता है कि सब कुछ अपने हिसाब से नहीं होता है। इससे आपके जीवन पर अनुकूल और प्रतिकूल दोनों तरह के प्रभाव पड़ते हैं। अगर समय आपके अनुरूप नहीं होता है तो ऐसी स्थिति में आप सरेंडर कर देते हैं। ऐसा बिल्कुल न करें, बल्कि आप अपने प्रयास में सतत लगे रहें। कई बार ऐसा भी होता है कि आप मंज़िल के एक कदम दूर रहते हैं और हार मान लेते हैं। इससे आपकी प्रतिभा क्षीण होती है। ऐसे में आपके लिए जरूरी है कि भले ही COVID 19 से आप लॉक डाउन में हैं, लेकिन अपने विचारों और क्रिएटिविटी को लॉकडाउन न होने दें।

5W और H को न भूलें

कई बार ऐसा होता है कि हम जब कम्फर्ट या अनकम्फर्ट जोन में रहते हैं तो ज्ञान हासिल करने की जिज्ञासा खत्म हो जाती है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो यकीन मानिए अब आपकी क्रिएटिविटी समाप्त होने वाली है। इसके लिए जरूरी है कि 5W और H को न भूलें। अगर आप किसी विषय के बारे में जानने को इच्छुक होंगे तो आपके जेहन में कई सवाल आएंगे जो आपके विचार को क्रिएटिविटी देने में सफल होंगे। ऐसे में जरूरी है कि आप जिज्ञासु बने रहें।

हौसले को बुलंद रखें

चाहे कोई भी परिस्थिति हो, आप कांफिडेंट रहें कि आप परिस्थिति से निपटने में कामयाब होंगे। इसके लिए आप अपने प्रयासों की सराहना स्वयं भी कर सकते हैं। इससे आपको आत्मबल मिलेगा और आप अपनी क्रिएटिविटी को बनाए रखने में कामयाब होंगे। खासकर लॉक डाउन में आप घर की चारदीवारी में कैद हैं। ऐसे में कई प्रकार के ख्याल आते हैं कि शायद अब कुछ नहीं बचा, लेकिन एक चीज़ याद रखें कि हर एक रात के बाद सुबह होती है।

पॉजिटिव रहें

COVID-19 से दहशत का माहौल बना हुआ है। ऐसे में आपको डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि पॉजिटिव रहने की जरूरत है। अगर आप पॉजिटिव होकर किसी भी परिस्थिति का सामना करते हैं तो आपकी मुश्किलें आसानी में बदल जाती हैं। फ़िलहाल पॉजिटिव रहकर आपको अपनी क्रिएटिविटी पर ध्यान देने की जरूरत है।

तैयार रहें

क्रिएटिविटी में एकाग्रता और निरंतरता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि आप हर समय चैलेंज के लिए तैयार रहें। खासकर COVID-19 महामारी में लॉक डाउन होना एक चैलेंज है। अगर आप अपने जीवन में हर एक मुश्किल समय से लड़ने के लिए तैयार रहेंगे तो आपकी क्रिएटिविटी बनी रहेगी।

सहनशील बनें

कहते हैं जीवन में कुछ पाने के लिए बहुत कुछ खोना पड़ता है। इस मुश्किल की घड़ी से निकलने के लिए संयम और सहनशक्ति बहुत जरूरी है। अगर आप लॉक डाउन हैं तो आपको इस समय अधिक क्रिएटिव होने चाहिए। अपने विचारों को उन्मुक्त हवाओं में सैर करने दें।

लगनशील रहें

जीवन में कुछ भी पाने के लिए लगनशील रहना बहुत जरूरी है। फिर चाहे आप अपने सपनों को पर देना चाहते हैं या फिर कुछ नया करना चाहते हैं। हर एक चीज़ के लिए लगन की बहुत जरूरत है। अगर समय आपके खिलाफ हो तो भी आपको अपने लक्ष्य को पाने के लिए तत्पर रहना चाहिए। COVID-19 महामारी के समय आप घर में बंद हैं, लेकिन आपके विचार और रचना बंद नहीं हैं। आपको बस उन विचार और रचनाओं को पर देने की जरूरत है। अगर आप ऐसा करने में कामयाब हो जाते हैं तो विश्वास करें, आपकी क्रिएटिविटी बनी रहेगी।


महिलाओं में उम्र के साथ बढ़ने लगती है प्रेग्नेंसी की समस्या

महिलाओं में उम्र के साथ बढ़ने लगती है प्रेग्नेंसी की समस्या

मॉर्डन ज़माने में धीरे धीरे इंसानों की मानसिकता बदलती जा रही है। लेकिन अधिक उम्र में मां बनना बच्चे और मां दोनों के हेल्थ के लिए खतरनाक है, क्योकि उम्र बढ़ने के साथ बच्चे को सही तरीके से पोषण नहीं मिल पाता है। अधिक उम्र न सिर्फ महिलाओं के लिए नुकसानदायक है बल्कि पुरुषो में भी प्रजनन क्षमता को कम करता है।

इसलिए आती है प्रेग्नेंसी की समस्या:

देर से शादी होने के कारण पुरुषों की प्रजनन शक्ति या शुक्राणु सीधे तौर पर प्रभावित होते है। इस कारण गर्भधारण करने में समस्या होती है।

उम्र बढने के साथ-साथ पुरुषों के शुक्राणु व महिला के अंडाणु की गुणवत्ता कमजोर होती चली जाती है। 

उम्र बढ़ने के साथ ही पुरुष व महिलाएं हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज व थायराइड जैसी बीमारियों की चपेट में आसानी से आ जाते है।

अधिक उम्र में शादी से महिलाओं की बच्चेदानी में ट्यूमर भी होने लगे हैं। देरी से स्तनपान, गांठ पैदा कर देता है जो स्तन कैंसर का खतरा बढ़ा देती है। 

30 से 35 साल की उम्र के बाद एबनॉर्मल प्रेग्नेंसी की संभावनायें बढ़ जाती हैं। अधिक उम्र में प्रेग्नेंट होने से नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बहुत कम हो जाती है।


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