सूखी खांसी और गीली खांसी में क्या है फर्क?

सूखी खांसी और गीली खांसी में क्या है फर्क?

भारत में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी बनाने के लिए कहा गया था। जिसके कुछ ही बाद देशभर में लॉकडाउन भी लगा दिया गया। 

एक्सपर्ट्स पहले ही ये बात कर चुके हैं कि कोरोना वायरस एक आम फ्लू के मुकाबले 10 गुना ज़्यादा ख़तरनाक है। यही वजह है कि देशभर में लोग इस वायरस के फैलने से परेशान हैं। COVID-19 के लक्षण धीरे-धीरे दिखाई देने शुरू होते हैं।

शुरुआत में ये लक्षण ज़ुकाम या फ्लू जैसे दिखते हैं। हालांकि, सूखी खांसी, एक ऐसा लक्षण है जिससे आपको पता चल सकता है कि ये फ्लू है या कोरोना वायरस। जी हां, आपके लक्षण कोरोना वायरस के हैं या नहीं ये इसी पर निर्भर करेगा कि खांसी कैसी है। 

सूखी खांसी और गीली खांसी में फर्क

खांसी तब होती है, जब बलगम, पोलन, धूल या एलर्जी करने वाले तत्वों के खिलाफ शरीर अपनी प्राकृतिक रक्षात्मक कार्रवाई शुरू करता है। COVID-19 पॉजिटिव के लगभग 60% मामलों में सूखी खांसी एक प्रमुख लक्षण दिखाई दिया। इस तरह के आंकड़ों के बाद, जैसे ही खांसी के लक्षण दिखाई देते हैं, लोगों का चिंता करना स्वाभाविक हो जाता है। हालांकि, सूखी और गीली खांसी में काफी फर्क होता है।

सूखी खांसी

सूखी खांसी में खांसते वक्त बलगम नहीं आता। इसकी वजह से आपके गले में गुदगुदी जैसा महसूस हो सकता है। इसकी तुलना में गीली खांसी के दौरान आपके फेफड़ों, नाक और गले में जमा बलगम खांसने पर बाहर आता है। सूखी खांसी इसलिए होती है क्योंकि आपके श्वसन तंत्र में सूजन या जलन होती है। अक्सर बैक्टीरिया या वायरस की वजह से फेफड़ों और गले में जलन होने लगती है।  

गीली खांसी

गीली खांसी को गीला इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसमें बलगम बाहर आता है या आपको गले में बलगम महसूस होता है। कुछ मामलों में इसके साथ नाक बहना, थकान जैसे लक्षण भी महसूस हो सकते हैं। कई मामलों में गीली खांसी के साथ पस या खून भी आ सकता है। वहीं, सूखी खांसी में बलगम या खून जैसा कुछ नहीं दिखता।

सूखी और गीली खांसी में दर्द और शोर की तीव्रता में भी फर्क होता है। एक सूखी खांसी में तरह-तरह की 'ध्वनि' पैदा होती है। लोग अपने गले के पीछे गुदगुदी या कर्कशता महसूस कर सकते हैं, जिसकी वजह से भी खांसी शुरू हो जाती है। गीली खांसी की तुलना सूखी खांसी ज़ुकाम या फ्लू ठीक के कई हफ्तों बाद भी नहीं जाती। कई मामलों में इसे ठीक करना मुश्किल देखा गया है, फिर चाहे बच्चे हों या बड़े।

हालांकि, सिर्फ सूखी खांसी ही कोरोना वायरस का लक्षण नहीं है। ये एलर्जी, साइनसाइटिस, अस्थमा, तोंसिल्लिटिस या धूल या धुएं से भी हो सकती है।

सूखी खांसी होने पर क्या करें?

अगर आपको सूखी खांसी है और आपको लगता है कि ये कोरोना वायरस भी हो सकता है, तो ऐसे में बाकी लक्षणों पर भी ग़ौर करें। तेज़ बुख़ार, स्वाद का न आना, सूंघने में परेशानी, सांस लेने में दिक्कत और डायरिया जैसे लक्षणों का ध्यान रखें। अगर ये लक्षण फिलहाल नहीं हैं तो, खांसी से राहत के लिए कफ सिरप या दवाई लें। इसके लिए आप स्टीम या ह्यूमिडीफायर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

इसके अलावा घरेलू उपाय भी सूखी खांसी में काफी फायदेमंद होते हैं। नमक के पानी से ग़रारे या अदर्क के साथ शहद पीना भी राहत दे सकता है।  


महिलाओं में उम्र के साथ बढ़ने लगती है प्रेग्नेंसी की समस्या

महिलाओं में उम्र के साथ बढ़ने लगती है प्रेग्नेंसी की समस्या

मॉर्डन ज़माने में धीरे धीरे इंसानों की मानसिकता बदलती जा रही है। लेकिन अधिक उम्र में मां बनना बच्चे और मां दोनों के हेल्थ के लिए खतरनाक है, क्योकि उम्र बढ़ने के साथ बच्चे को सही तरीके से पोषण नहीं मिल पाता है। अधिक उम्र न सिर्फ महिलाओं के लिए नुकसानदायक है बल्कि पुरुषो में भी प्रजनन क्षमता को कम करता है।

इसलिए आती है प्रेग्नेंसी की समस्या:

देर से शादी होने के कारण पुरुषों की प्रजनन शक्ति या शुक्राणु सीधे तौर पर प्रभावित होते है। इस कारण गर्भधारण करने में समस्या होती है।

उम्र बढने के साथ-साथ पुरुषों के शुक्राणु व महिला के अंडाणु की गुणवत्ता कमजोर होती चली जाती है। 

उम्र बढ़ने के साथ ही पुरुष व महिलाएं हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज व थायराइड जैसी बीमारियों की चपेट में आसानी से आ जाते है।

अधिक उम्र में शादी से महिलाओं की बच्चेदानी में ट्यूमर भी होने लगे हैं। देरी से स्तनपान, गांठ पैदा कर देता है जो स्तन कैंसर का खतरा बढ़ा देती है। 

30 से 35 साल की उम्र के बाद एबनॉर्मल प्रेग्नेंसी की संभावनायें बढ़ जाती हैं। अधिक उम्र में प्रेग्नेंट होने से नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बहुत कम हो जाती है।


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