हाई-सिक्यॉरिटी विशेषता से लैस कारों पर भूलकर भी न करें भरोसा

हाई-सिक्यॉरिटी विशेषता से लैस कारों पर भूलकर भी न करें भरोसा
नई दिल्ली: इन दिनों कारें ईबीडी के साथ एबीएस ( ABS with EBD), हिल असिस्ट कंट्रोल (Hill Assist Control), कोलिजन वार्निंग सिस्टम, (Collision Warning System), लेन असिस्ट सिस्टम (Lane Assist System), सेमी-ऑटोनॉमस ड्राइव मोड (Semi-Autonomous Drive Mode), सेल्फ-पार्किंग (Self-Parking) जैसे कई हाई-सिक्योरिटी विशेषता (High-Security Features) से लैस की जा रही हैं अमेरिका में किए गए एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि कार में दिए जाने वाले ये हाई-सेफ्टी विशेषता पर पूरी तरह से भरोसा करना ठीक नहीं है
अध्ययन में पता चली ये बात
इंश्योरेंस इंस्टीट्यूट फॉर हाईवे सेफ्टी और एमआईटी के एज प्रयोगशाला द्वारा एक महीने तक भिन्न-भिन्न वालेंटियर्स पर किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया कि असिस्ट सिस्टम का आदी होने के बाद ड्राइवर कार चलाने के दौरान सुरक्षा मानकों पर पहले जितना ध्यान नहीं दे रहे थे ज्यादातर ड्राइवर्स सेफ्टी विशेषता पर आवश्यकता से अधिक भरोसा करते हुए भी देखे गए, जिससे उनका ध्यान भी कई बार भटकता हुआ नजर आया इस अध्ययन के लिए अडॉप्टिव क्रूज़ कंट्रोल से लैस रेंज रोवर इवोक और पाइलट असिस्ट से लैस वोल्वो S90 कार का प्रयोग किया गया था
क्या कह रहे वैज्ञानिक
अध्ययन में पाया गया कि शुरूआत में ड्राइवरों ने सेफ्टी विशेषता पर पूरा भरोसा न करते हुए स्वयं की ड्राइविंग पर भरोसा किया लेकिन समय बीतने के साथ ड्राइवरों का ध्यान भटकने लगा IIHS के सीनियर रिसर्च साइंटिस्ट इयान रीगेन ने कहा, "अध्ययन की शुरूआत में और पाइलट असिस्ट का इस्तेमाल करने के बाद ड्राइवरों का ध्यान भटकने की संख्या में बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई"

सेफ्टी विशेषता पर न करें आंख मूंदकर भरोसा
इस अध्ययन में देखा गया कि टेस्ला के ऑटोपायलट, कैडिलैक के सुपर क्रूज और मर्सिडीज बेंज के इंटेलिजेंट ड्राइव की ही तरह वोल्वो के पायलट असिस्ट सिस्टम के भरोसे कार से ड्राइवर को अभी भी रिप्लेस नहीं किया जा सकता है असली दुनिया की परिस्थितियों के साथ ढलने में इस सेफ्टी सिस्टम को अभी बहुत समय लगेगा क्योंकि यह सिस्टम गाड़ी की स्पीड और स्टियरिंग को कंट्रोल करती है, इसलिए कई बार ड्राइवर इन पर आवश्यकता से अधिक भरोसा कर लेते हैं इसलिए यह सलाह दी जाती है कि गाड़ी में चाहे जितने भी सेफ्टी विशेषता होने के दावा किया जाए लेकिन उन पर आंख बंद करके विश्वास करना ठीक नहीं है क्योंकि यहां बात आपकी सेफ्टी की है

फोर्ड कंपनी के चेन्नई प्लांट में उत्पादन हुआ बंद, जानें

फोर्ड कंपनी के चेन्नई प्लांट में उत्पादन हुआ बंद, जानें

चेन्नई : कोरोना महामारी के चलते भारत में वाहन निर्माता कंपनियां बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। आपको बता दें कि साल 2019 के मध्य में कार निर्माताओं ने मंदी के साथ व्यापार शुरू किया और साल 2020 की शुरुआत में पूरी तरह से बंद हो गया। वाहन निर्माता कंपनियों की बिक्री पिछले महीने से धीरे धीरे बढ़ती हुई नजर आ रही है। फोर्ड इंडिया कंपनी को पोंगल की छुट्टियों के बाद एक हफ्ते के लिए अपने चेन्नई प्लांट को बंद करना पड़ा है।

फोर्ड इंडिया कंपनी ने बंद किया चेन्नई वाला प्लांट
ऑटो उद्योग उम्मीद से ज्यादा तेजी से वापस आया है लेकिन इसके बाद भी इस सेगमेंट में स्पेयर पार्ट्स और कई महत्वपूर्ण एक्सेसरीज की भारी कमी है। आपको बता दें कि ऑटो उद्योग कई पार्ट्स की कमी से प्रभावित है, लेकिन खास तौर पर सेमी कंडक्टर की कमी देखने को मिली है। इसी के चलते फोर्ड इंडिया कंपनी ने 14 जनवरी को 3 दिवसीय उत्सव के लिए अपने चेन्नई वाले प्लांट को बंद कर दिया गया था लेकिन अब इसे 24 जनवरी तक बंद करने की घोषणा की गई है।

गुजरात प्लांट का उत्पादन भी प्रभावित होने की संभावना
अभी तक ऐसा लग रहा था कि पार्ट्स का प्रभाव सिर्फ फोर्ड की चेन्नई वाले प्लांट तक ही महसूस किया जा रहा था लेकिन ऐसा नहीं है। इसका प्रभाव साणंद, गुजरात प्लांट का उत्पादन भी अगले 2 से 3 महीने तक प्रभावित होगा। आपको बता दें कि सेमी कंडक्टरों की कमी अगले तीन महीने तक प्रभावित रहेगी। कंपनी आपूर्ति की पूर्ति के लिए कोशिश कर रही है। इसके बाद भी वैश्विक परिस्थियां कंपनी के अनुकूल नहीं दिख रही है।

ये पार्ट्स कार निर्माता कंपनी के लिए भी जरूरी
सेमी कंडक्टर की बात करें तो यह कम्पोनेंट मोबाइल फोन, गेमिंग कंसोल और अन्य हैंडी गैजेट सेगमेंट में एक महत्वपूर्व इलेक्ट्रॉनिक भाग हैं जिनकी मांग काफी ज्यादा है। आपको बता दें कि कोरोना महामारी के दौरान जहां सभी लोग घर से काम कर रहे हैं। ऐसे में इन गैजेट्स की मांग में काफी उछाल देखने को मिली। ये पार्ट्स कार निर्माता कंपनी के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।


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