इस वजह से सरकार बड़ा सकती है जीएसटी की दरें

इस वजह से सरकार बड़ा सकती है जीएसटी की दरें

रेवेन्यू की धीमी होती गति बढ़ाने को चीज एवं सेवा कर (जीएसटी) की मौजूदा दरों में संशोधन पर विमर्श की प्रक्रिया तेज हो गई है. मंगलवार को इस विषय में गठित केन्द्र व राज्यों के अधिकारियों के एक समूह की मीटिंग हुई जिसमें विभिन्न विकल्पों पर विचार हुआ. अभी समिति ने अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप नहीं दिया है लेकिन जिन विकल्पों पर विचार हुआ उनमें तंबाकू उत्पादों पर सेस की दर में वृद्धि करने का सुझाव भी शामिल है.

सूत्रों के मुताबिक मीटिंग में कई विकल्पों पर विचार हुआ. इनमें एक विकल्प GST की पांच परसेंट की दर को बढ़ाकर अधिकतम आठ परसेंट व 12 परसेंट को बढ़ाकर अधिकतम 15 परसेंट करने का सुझाव भी शामिल है. इसके अलावा एक सुझाव GST की दरों को 10 व 20 परसेंट के दो स्लैब निर्धारित करने का भी मीटिंग में विचार के लिए आया. मीटिंग में एक विकल्प पांच परसेंट के स्लैब को बढ़ाकर छह परसेंट करने का भी आया. एक सुझाव यह भी आया है कि ग्राहकों को खरीदारी के वक्त रसीद लेने के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए लॉटरी सिस्टम प्रारम्भ किया जाए.

 

जल्दी ही अधिकारियों की यह समिति रेवेन्यू सचिव को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. इसके बाद रिपोर्ट पर विचार विमर्श व फिटमेंट व लॉ कमेटी के सुझावों के साथ यह GST काउंसिल के पास जाएगी. इसके बाद ही रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर GST काउंसिल में प्रस्तुत किया जाएगा. काउंसिल ही GST की दरों के पुनर्गठन के विषय में अंतिम निर्णय लेगी. अभी GST के चार स्लैब पांच, 12, 18 व 28 परसेंट लागू हैं. 28 परसेंट GST के दायरे में आने वाली वस्तुओं व सेवाओं पर सेस भी वसूला जाता है.

 

जीएसटी की दरों के पुनर्गठन पर विचार ने ऐसे समय में जोर पकड़ा है, जब GST से मिलने वाला रेवेन्यू अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पा रहा है. यहां तक कि केन्द्र के लिए कंपनसेशन फंड से राज्यों के रेवेन्यू में कमी की क्षतिपूर्ति करना भी कठिन हो रहा है. बताते चलें कि अक्टूबर में GST कलेक्शन 19 महीने के न्यूनतम पर चला गया था. इसके बाद ही GST काउंसिल ने रेवेन्यू में सुधार पर विचार करने के लिए अधिकारियों की समिति का गठन किया था.

 

बारह सदस्यों वाली इस समिति में पांच मेम्बर केन्द्र से व पांच राज्यों से हैं. समिति में तमिलनाडु, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल व पंजाब के एसजीएसटी कमिश्नर को मेम्बर के तौर पर शामिल किया गया है. इनके अतिरिक्त GST काउंसिल में संयुक्त सचिव व जीएसटीएन के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट को भी समिति का मेम्बर बनाया गया है.

स्थायी समिति ने जताई चिंता

वित्त पर संसद की स्थायी समिति ने रेवेन्यू के लक्ष्य के मुकाबले GST कलेक्शन धीमा रहने पर चिंता जताई है. मंगलवार को लोकसभा में प्रस्तुत समिति की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि लांच के दो वर्ष बाद सरकार ने GST की दरों के पुनर्गठन की प्रक्रिया प्रारम्भ की है. समिति ने सरकार से अपेक्षा की है कि वह जल्दी ही इस परेशानी का निवारण निकालेगी ताकि रेवेन्यू बढ़ाने के अपेक्षित लक्ष्य को पूरा किया जा सके. समिति ने रेवेन्यू विभाग को इनपुट कर क्रेडिट व्यवस्था का दुरुपयोग रोकने की दिशा में सतर्क रहने की हिदायत भी दी है.

 

प्रत्यक्ष कर संग्रह की गति भी धीमी

चालू वित्त साल के दौरान अप्रत्यक्ष कर संग्रह की स्थिति तो बेकार है ही, लेकिन प्रत्यक्ष कर संग्रह की स्थिति भी बहुत उत्साहजनक नहीं है. वित्त साल 2019-20 के पहले आठ महीनों के दौरान प्रत्यक्ष कर संग्रह में महज 1.6 फीसद की बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में सरकार के लिए राजकोषीय संतुलन साधने को लेकर नयी चिंताएं पैदा होने के इशारा हैं. वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने राज्यसभा में प्रत्यक्ष कर संग्रह के जो आंकड़े दिए हैं, वह पहली बार सरकार की तरफ से जारी किए गए हैं.

 

अप्रैल से नवंबर, 2019 के दौरान कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह 5,56,490 करोड़ रुपये का रहा, जबकि इसके पिछले वित्त साल (2018-19) की समान अवधि में यह संग्रह 5,47,711 करोड़ रुपये रहा था. बताते चलें कि चालू वित्त साल के बजट में पर्सनल इनकम टैक्स के लिए 5,59,000 करोड़ रुपये व कॉरपोरेट कर के लिए 7,66,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था. जाहिर है कि शेष बचे चार महीनों में सरकार को निर्धारित लक्ष्य का 60 फीसद से ज्यादा संग्रह करना है.