रेलवे लाइन पर बिजली से चलने वाली ट्रेनों का दायरा बढ़ेगा, राष्ट्रीय रेल योजना 2030 का भी एलान

रेलवे लाइन पर बिजली से चलने वाली ट्रेनों का दायरा बढ़ेगा, राष्ट्रीय रेल योजना 2030 का भी एलान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आम बजट पेश कर रही हैं। इस दौरान 2021-21 के लिए उन्होंने रेलवे से जुड़े कई एलान किए हैं। सबसे पहले तो उन्होंने 1,10,055 करोड़ रुपये रेलवे के लिए आवंटित किए। इसके अलावा सीतारमण ने रेलवे के लिए रेल योजना 2030 के बारे में भी जानकारी दी। जिसका उद्देश्य मेक इन इंडिया को सक्षम करने के लिए उद्योग के लिए लॉजिस्टिक लागत में कमी लाना बताया गया।

वहीं, उन्होंने इस दौरान बताया कि बिजली से चलने वाली ट्रेनों के लिए दायरा बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बजट भाषण में बताया कि 46 हजार किलोमीटर रेलवे लाइन पर ट्रेनें बिजली से दौड़ेंगी। इसके अलावा उन्होंने कहा कि एनआरपी (National Rail Plan) 2023 के ड्राफ्ट पर तेजी से काम किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि देश में सिर्फ एक निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन परियोजना है, जो मुंबई को अहमदाबाद से जोड़ेगी। 

रेलवे बजट में उनकी बड़ी बातों में

-46 हजार किलोमीट की रेलवे लाइन पर ट्रेनें बिजली से दौड़ेंगी।

-पर्यटन वाले रेलवे ट्रैक पर नए और आधुनिक कोच लाए जाएंगे।

-चेन्नई मेट्रो के दूसरे चरण के लिए 63 हजार करोड़ आवंटित किए गए हैं।

-2030 तक नेशनल रेल प्लान तैयार हो सके, उसपर तेजी से काम।

2017 से पहले आम बजट और रेलवे बजट अलग-अलग पेश किया जाता था, लेकिन अरुण जेटली पहले ऐसे वित्त मंत्री रहे, जिन्होंने आम बजट और रेलवे बजट को संयुक्त रूप से पेश किया। उन्होंने एक फरवरी 2017 को ऐसा किया था। साथ ही दोनों को अलग-अलग पेश ना करते हुए एक ही बजट के समान पेश करने से 92 साल की परंपरा खत्म हुई थी। वहीं, रेलवे बजट के आम बजट में विलय के बाद से कई बड़ी घोषणाएं हुई हैं। इनमें 550 स्टेशनों पर वाईफाई शुरू करने का ऐलान हुआ था। रेलवे ट्रैक के साथ सोलर पॉवर प्लांट लगाए जाने की बात कही गई थी।


45 दिनों में 12 लाख करोड़ रुपये का हुआ नुकसान!

45 दिनों में 12 लाख करोड़ रुपये का हुआ नुकसान!

कोविड-19 वायरस महामारी की दूसरी लहर में लोग जीवन और मृत्यु की जंग लड़ रहे हैं, तो दूसरी ओर देश का व्यापार भी दम तोड़ रहा है। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का बोलना है कि देश का व्यापार बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहा है। कोविड-19 की दूसरी लहर ने व्यापारियों की कमर ही तोड़ दी है।  

CAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल का बोलना है कि कोविड-19 वायरस के प्रकोप से पिछले 45 दिनों में हिंदुस्तान के घरेलू व्यापार को 12 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, जो एक बड़ा नुकसान है और निश्चित रूप से ऐसे समय में जब लॉकडाउन वापस लिए जाएगा तब व्यापारियों को अपने व्यापार को दोबारा खड़ा करना बहुत मुश्किल होगा। प्रति साल देश भर में  में लगभग 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये का व्यापार होता है। देश में लगभग 8 करोड़ छोटे बड़े बिज़नस मैन हैं जो देश के घरेलू व्यापार को चलाते है।

CAIT ने बोला कि कारोबार के लगभग 12 लाख करोड़ रुपये के व्यापारिक नुकसान में रीटेल व्यापार में लगभग 7.50 लाख करोड़ रुपये और थोक व्यापार में लगभग 4.50 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक महाराष्ट्र को करीब 1.10 लाख करोड़, दिल्ली को करीब 30 हजार करोड़, गुजरात को करीब 60 हजार करोड़, यूपी को करीब 65 हजार करोड़, मध्य प्रदेश को करीब 30 हजार करोड़, राजस्थान को करीब 25 हजार करोड़, छत्तीसगढ़ को लगभग 23 हजार करोड़, कर्नाटक को  लगभग 50 हजार करोड़ का व्यापार का नुकसान हुआ है।  

भरतिया और खंडेलवाल ने वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया कि लॉकडाउन हटने पर व्यापारियों को उनकी व्यावसायिक गतिविधियों को बहाल करने के लिए एक वित्तीय पैकेज दिया जाए। व्यापारियों की जिम्मेदारी केवल केन्द्र सरकार की नहीं है बल्कि प्रदेश सरकारें भी अपने-अपने राज्यों के व्यापारियों के लिए उत्तरदायी हैं।
उन्होंने बोला कि पिछले वर्ष लॉकडाउन के दौरान व्यापारियों को सरकार की ओर से घोषित पैकेजों में कोई स्थान नहीं मिली थी, जबकि बाकी सेक्टर्स के हितों का पूरा ध्यान रखा गया था।

उन्होंने बोला कि पहले तरीका के रूप में सरकार को GST, आयकर और टीडीएस के अनुसार सभी कंप्लायंस की वैधानिक तिथियों को कम से कम 31 अगस्त, 2021 तक के लिए स्थगित कर देना चाहिए। बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को व्यापारियों को सरल ढंग से और रियायती ब्याज दर पर लोन देने का आदेश दिया जाए। डिजिटल भुगतान करने पर बैंक शुल्क माफ किया जाना चाहिए और सरकार बैंक शुल्क सीधे बैंकों को सब्सिडी दे सकती है।  

CAIT का बोलना है कि जिन राज्यों में मार्केट शुरुआती दिनों में खुले थे और बाद में कुछ घंटों के लिए आंशिक रूप से खुले थे, वहां ग्राहकों की बहुत कम भीड़ थी क्योंकि लोग डर की चपेट में हैं और आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी को छोड़कर बाजारों में जाने से बच रहे है। उन्होंने बोला कि इससे ई-कॉमर्स कारोबार में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, यह देखा गया है कि कोविड दिशा-निर्देशों में प्रतिबंधों के बावजूद ई-कॉमर्स कंपनियां गैर-जरूरी वस्तुओं की बिक्री में लगी हुई हैं और किसी भी प्रदेश ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है। CAIT का बोलना है कि ऐसा लगता है कि इन कंपनियों को कानून और नीति का उल्लंघन करने की अनुमति दी हुई है और उन्हें अब कानून का कोई डर नहीं है।


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