अपनी पहली कार को खरीदनें से पहले ध्यान रखें ये बात, समय के साथ पैसों की भी होगी बचत

अपनी पहली कार को खरीदनें से पहले ध्यान रखें ये बात, समय के साथ पैसों की भी होगी बचत

अपनी पसंद की कार को खरीदना हर किसी का सपना होता है,लोग सालों साल मेहनत करने के बाद अपने वाहन के लिए पैसे जोड़ते हैं। हालांकि अब ऑटो लोन ने लोगों को काफी राहत दी है, लेकिन फिर भी डाउनपेमेंट के लिए एक आम आदमी को काफी सोचना पड़ता है। जब आप अपनी पहली कार को खरीदनें जाते हैं, तो कई ऐसी चीजें होती हैं, जिनके ना पता होने से आप ज्यादा पैसा खर्च कर देते हैं। अपने इस लेख में हम आपको कुछ एसी चीजें बताने जा रहे हैं, जिनसे ना सिर्फ आप अपना पैसा बल्कि समय भी बचा सकते हैं। 

1. अपना बजट देखें इससे पहले कि आप कारों को देखना शुरू करें।

खरीदारी करना हमेशा मज़ेदार किस्सा होता है, फिर चाहे कपड़ों की हो या कार की। सबसे पहले जब भी आप कार खरीदनें का मन बनाएं तो अपना बजट देखें। बजट को फिक्स करके बजट में मौजूद वाहन की तलाश करें। अगर आप एक बार बजट में कार तलाश करना शुरू करेंगे तो आपको बाद में ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कहा जाता है कि कार की कुल कीमत अपनी वार्षिक आय के 30% से 35% से कम रखें। वहीं आपकी प्रतिमाह जानें वाली ईएमआई मासिक आय का 10% से अधिक नहीं होनी चाहिए।


2. इस्तेमाल की गई कार खरीदना पहली कार के लिए सबसे अच्छा सौदा है।

अगर आप अपने जीवन की पहली कार खरीद रहे हैं, तो सेकेंड हैंड कार को खरीदें। क्योंकि सेकेंड हैंड कार आपके बजट में आसानी से फिट हो सकती हैं। एक या दो साल पुरानी कार को आप आराम से खरीदकर इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे आप फाइनेंस के ज्यादा इंट्रेस्ट रेट से बच जाते हैं, क्योंकि उपयोग की गई कारों की ब्याज दर प्रतिशत कम होती है।


3. अपने आप चुनें फाइनेंस और बीमा कंपनी।

फाइनेंसिंग और इंश्योरेंस एक बड़ा तरीका है जिससे डीलरशिप पैसा कमाते हैं। अगर आप अपनी पसंद की बीमा और फाइनेंस कंपनी चुनते हैं, यानी डीलरशिप को इसमें शामिल नहीं करते हैं, तो इससे आप अपना अच्छा पैसा बचा सकते हैं।  


45 दिनों में 12 लाख करोड़ रुपये का हुआ नुकसान!

45 दिनों में 12 लाख करोड़ रुपये का हुआ नुकसान!

कोविड-19 वायरस महामारी की दूसरी लहर में लोग जीवन और मृत्यु की जंग लड़ रहे हैं, तो दूसरी ओर देश का व्यापार भी दम तोड़ रहा है। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का बोलना है कि देश का व्यापार बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहा है। कोविड-19 की दूसरी लहर ने व्यापारियों की कमर ही तोड़ दी है।  

CAIT के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल का बोलना है कि कोविड-19 वायरस के प्रकोप से पिछले 45 दिनों में हिंदुस्तान के घरेलू व्यापार को 12 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, जो एक बड़ा नुकसान है और निश्चित रूप से ऐसे समय में जब लॉकडाउन वापस लिए जाएगा तब व्यापारियों को अपने व्यापार को दोबारा खड़ा करना बहुत मुश्किल होगा। प्रति साल देश भर में  में लगभग 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये का व्यापार होता है। देश में लगभग 8 करोड़ छोटे बड़े बिज़नस मैन हैं जो देश के घरेलू व्यापार को चलाते है।

CAIT ने बोला कि कारोबार के लगभग 12 लाख करोड़ रुपये के व्यापारिक नुकसान में रीटेल व्यापार में लगभग 7.50 लाख करोड़ रुपये और थोक व्यापार में लगभग 4.50 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक महाराष्ट्र को करीब 1.10 लाख करोड़, दिल्ली को करीब 30 हजार करोड़, गुजरात को करीब 60 हजार करोड़, यूपी को करीब 65 हजार करोड़, मध्य प्रदेश को करीब 30 हजार करोड़, राजस्थान को करीब 25 हजार करोड़, छत्तीसगढ़ को लगभग 23 हजार करोड़, कर्नाटक को  लगभग 50 हजार करोड़ का व्यापार का नुकसान हुआ है।  

भरतिया और खंडेलवाल ने वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया कि लॉकडाउन हटने पर व्यापारियों को उनकी व्यावसायिक गतिविधियों को बहाल करने के लिए एक वित्तीय पैकेज दिया जाए। व्यापारियों की जिम्मेदारी केवल केन्द्र सरकार की नहीं है बल्कि प्रदेश सरकारें भी अपने-अपने राज्यों के व्यापारियों के लिए उत्तरदायी हैं।
उन्होंने बोला कि पिछले वर्ष लॉकडाउन के दौरान व्यापारियों को सरकार की ओर से घोषित पैकेजों में कोई स्थान नहीं मिली थी, जबकि बाकी सेक्टर्स के हितों का पूरा ध्यान रखा गया था।

उन्होंने बोला कि पहले तरीका के रूप में सरकार को GST, आयकर और टीडीएस के अनुसार सभी कंप्लायंस की वैधानिक तिथियों को कम से कम 31 अगस्त, 2021 तक के लिए स्थगित कर देना चाहिए। बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को व्यापारियों को सरल ढंग से और रियायती ब्याज दर पर लोन देने का आदेश दिया जाए। डिजिटल भुगतान करने पर बैंक शुल्क माफ किया जाना चाहिए और सरकार बैंक शुल्क सीधे बैंकों को सब्सिडी दे सकती है।  

CAIT का बोलना है कि जिन राज्यों में मार्केट शुरुआती दिनों में खुले थे और बाद में कुछ घंटों के लिए आंशिक रूप से खुले थे, वहां ग्राहकों की बहुत कम भीड़ थी क्योंकि लोग डर की चपेट में हैं और आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी को छोड़कर बाजारों में जाने से बच रहे है। उन्होंने बोला कि इससे ई-कॉमर्स कारोबार में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, यह देखा गया है कि कोविड दिशा-निर्देशों में प्रतिबंधों के बावजूद ई-कॉमर्स कंपनियां गैर-जरूरी वस्तुओं की बिक्री में लगी हुई हैं और किसी भी प्रदेश ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है। CAIT का बोलना है कि ऐसा लगता है कि इन कंपनियों को कानून और नीति का उल्लंघन करने की अनुमति दी हुई है और उन्हें अब कानून का कोई डर नहीं है।


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