कैब सर्विस को ग्लोबल बनाने और इलेक्ट्रिक व्हीकल पर फोकस

कैब सर्विस को ग्लोबल बनाने और इलेक्ट्रिक व्हीकल पर फोकस

शेयर्ड मोबिलिटी कंपनी ओला के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर भाविश अग्रवाल ने उबर के साथ विलय की वार्ता से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है. अग्रवाल ने ट्वीट किया कि ओला बहुत प्रॉफिटेबल है और अच्छी तरह से बढ़ रही है और अमेरिकी फर्म के साथ विलय की वार्ता की खबरें “बिल्कुल बकवास” हैं. यदि कुछ अन्य कंपनियां हिंदुस्तान से अपने बिजनेस से बाहर निकलना चाहती हैं तो उनका स्वागत है! हम कभी विलय नहीं करेंगे. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बोला गया था कि दोनों कंपनियां मर्जर पर वार्ता कर रही है.

कैब और इलेक्ट्रिक बिजनेस का परफॉर्मेंस अच्छा
कुछ दिन पहले भी कंपनी ने दावा किया था कि उसका कैब सर्विस बिजनेस महीने रेट महीने प्रॉफिटेबल बन रहा है और EV बिजनेस भी अच्छा परफॉर्म कर रहा है. कुछ महीने के भीतर ही ओला इलेक्ट्रिक हिंदुस्तान की बड़ी EV कंपनी बन गई है. कंपनी ने बोला था, ‘हम हिंदुस्तान में इलेक्ट्रिक क्रांति में तेजी लाने और 50 करोड़ हिंदुस्तानियों को सर्व करने के लिए बहुत उत्साहित है और उसी बिजनेस पर फोकस कर रहे हैं.

ओला की अपनी कार नहीं, फिर पैसे कैसे कमाती है?
ओला केवल कैब बुकिंग की सर्विस मौजूद कराती है. कंपनी के पास अपनी कोई कार नहीं है. ऐप के जरिए वो कस्टमर्स को कैब और ड्राइवर्स को कस्टमर से जोड़ती है. ऐप पर हुई सभी बुकिंग्स पर किराए का 15% कंपनी कमीशन लेती है.

ओला के सामने चुनौतियां कम नहीं
ओला सीधे तौर पर US की लीडिंग कंपनी ऊबर से मुकाबला करती है. इसके अतिरिक्त हिंदुस्तान में अन्य कॉम्पिटीटर्स में मेरू कैब, जूमकार और रैपिडो शामिल हैं. ओला ने अब तक कुल 6 अधिग्रहण किए हैं. उनमें टैक्सी फॉर श्योर, जियोटैग, क्वार्थ, फूडपांडा, रिडलर और पिकअप शामिल हैं.

कैब सर्विस को ग्लोबल बनाने और इलेक्ट्रिक व्हीकल पर फोकस
ओला ने हिंदुस्तान के अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और UK में अपनी कैब सर्विस प्रारम्भ की है. भाविश अग्रवाल का बोलना है कि हमने हिंदुस्तान में एक सस्टेनेबल बिजनेस मॉडल बना लिया है. अब हम इसे ग्लोबल स्तर पर लेकर जाना चाहते हैं.

कंपनी का दूसरा फोकस मोबिलिटी को इन्वायरनमेंट फ्रेंडली बनाने पर है. भाविश का बोलना है कि हिंदुस्तान की ज्यादातर जनसंख्या टू व्हीलर या थ्री व्हीलर वाहनों पर चलती है. यदि इसे इलेक्ट्रिक कर दिया जाए तो इसका बड़ा इम्पैक्ट दिखेगा. हम अगले कुछ वर्ष में 10 लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल रोड पर देखना चाहते हैं.

टैक्सी ड्राइवर के झगड़े से निकला था आइडिया
ओला के फाउंडर भाविश अग्रवाल हैं. उन्होंने 2008 में IIT बॉम्बे से बीटेक की पढ़ाई की. कॉलेज के बाद माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च में दो वर्ष तक जॉब की. इसके बाद उन्होंने एक औनलाइन वेबसाइट Olatrip.com प्रारम्भ की जो हॉलीडे पैकेज और वीकेंड ट्रिप प्लान करती थी.

एक दिन भाविश ने बेंगलुरु से बांदीपुर के लिए टैक्सी बुक की. रास्ते में टैक्सी ड्राइवर ने अधिक किराया देने की बात कही. भाविश ने इनकार किया तो ड्राइवर उन्हें बीच रास्ते छोड़कर चला गया. इस कठिनाई से उन्हें एक आइडिया क्लिक किया.

उन्हें महसूस हुआ कि ऐसी परेशानी का सामना करोड़ों लोग करते होंगे. भाविश ने अपनी ट्रैवल वेबसाइट को कैब सर्विस में बदलने का निर्णय किया. उन्होंने IIT बॉम्बे के ही अंकित भाटी के साथ ये आइडिया शेयर किया. दोनों ने मिलकर 3 दिसंबर 2010 को ओला कैब्स लॉन्च कर दिया.