टिकारी राज के दशहरे की यादें आज भी लोकप्रिय, जब प्रजा अपने राजा का दर्शन करने के बाद प्रसाद लेती

टिकारी राज के दशहरे की यादें आज भी लोकप्रिय, जब प्रजा अपने राजा का दर्शन करने के बाद प्रसाद लेती

टिकारी राज का दशहरा जमाने में काफी लोकप्रिय था। राज का अंतिम महाराजा कैप्टन गोपाल शरण सिंह के जमाने में इसकी प्रसिद्धि चरम सीमा पर थी। यहां के दशहरा को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते थे दशहरा के अंतिम दिन का शाही जुलूस दर्शकों के लिए आकर्षण का विशेष केंद्र बना रहता था। जुलूस की छटा देखने में काफी निराली लगती थी महाराजा का रहन-सहन विलायती था। इसलिय इनके दोस्त में काफी अंग्रेज अधिकारी रहा करते थे इस कारण विदेशी मेहमान भी मां दुर्गा के भव्य दर्शन करने के लिए टिकारी राज आते थे।

यहां के स्थानीय कलाकारों के द्वारा दुर्गा मां की भव्य मूर्ति बनाई जाती थी। स्थापित मूर्ति के अगल- बगल की फूलों के सजावट देखने लायक होती थी। माँ दुर्गा के बगल में शुभ नीलकंठ भी विराजमान रहते थे। मूर्ति स्थल के बगल में शारदीय नवरात्र के अवसर पर ब्राम्हणों के द्वारा माँ दुर्गा सप्तशती का नौ दिन पाठ किया जाता था। जिससे पूरा किला परिसर भक्ति एवं मंत्रो से गूंजामायन रहता था। स्थापित मूर्ति के आगे विशाल मैदान में फूलों की जबरदस्त सजावट रहती थी, जो देखने लायक रहती थी। विशाल मैदान से आगे कमल फूल से आच्छादित विशाल तालाब के किनारे घूमते हुए दर्शक एवं सैलानियों की भीड़ देखने लायक होती थी।

दुर्गा मां को पूजा अर्चना करते हुए महाराजा को देखने के लिए भीड़ काफी लालायित रहती थी। उनके दर्शन मात्र को पाकर प्रजागण अपने को धन्य भाग्य समझती थी। राज परिवार की ओर से मां के प्रसाद के रूप में मिठाइयां प्रजागण को बांटी जाती थी। टिकारी राज सात आना की राजकुमारी भुवनेश्वरी कुंवर भी अपने राज में होने वाले दुर्गा पूजा महोत्सव में बढ़ चढ़ कर भाग लेती थी। दिल खोल कर इस आयोजन में आर्थिक सहयोग देती थी। पर्व समापन पर राम लीला एवं अन्य में क्षेत्र में भाग लेने वाले कलाकार को इनाम देती थी। राज में अपनी बिजली घर रहने के कारण किला एवं मेला परिसर बिजली से जगमग करता रहता था। रंग बिरंग बल्ब के रोशनी से किला परिसर नहाया रहता था।

रंगीन लाइट्स के चलते किला की छठा देखते ही बन बनती थी। शाम होते ही किला परिसर का नजर देखते ही बनता था। किला परिसर में स्थापित मूर्ति स्थल पर शारदीय नवरात्र में ब्राह्मणों के द्वारा दुर्गा सप्तशती का 9 दिन का पाठ किया जाता था। जिसके वजह से पूरा किला परिसर भक्तिमय और मंत्रों से गुंजायमान रहता था। टिकारी राज सात आना के विशाल मैदान में विजयादशमी के दिन रावण का विशाल पुतला को बीच मैदान में खड़ा किया जाता था और शाम के समय हजारों नागरिकों के सामने रावण दहन का कार्यक्रम किया जाता था, वह देखने लायक होता था। दशहरा के अवसर पर किला के विशाल मैदान के बगल में रामलीला का मंच बनाया जाता था और वहां पर 9 दिन का राम लीला का कार्यक्रम होता था जिसको देखने के लिए राज्यवासी दूर-दूर से आते थे और राम लीला को देख भरपूर आनंदमय हो जाते थे।


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तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) प्रशासन लालबाग आवासीय परिसर की सुरक्षा को लेकर उदासीन बना हुआ है। नौ अक्टूबर की रात पीजी इतिहास विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. राधिक मिश्रा से लूट के बाद भी लालबाग की सुरक्षा ताक पर है। 13 दिन बीत जाने के बाद भी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया है। इस कारण दोबारा किसी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है। परिसर के सुरक्षा फाइलों में हो रही है।


प्रवेश द्वार पर बेरोकटोक आवाजाही

घटना के इतने दिन बाद कई बार अधिकारियों ने परिसर का निरीक्षण किया। मुख्य द्वार पर 24 घंटे अलग-अलग शिफ्ट में गार्ड के तैनाती की बात हुई। दो दिनों तक गार्ड की मौजूदगी रही, लेकिन स्थिति फिर जस की तस हो गई है। मुख्य द्वार लोगों का बेरोकटोक आना जाना लगा हुआ है।

क्वार्टर का ग्रिल और गेट तक बदमाशों ने बेच डाला

लालबाग के क्वार्टर नंबर 19 की बुरी हालत है। एक शिक्षक के क्वार्टर खाली करने के बाद बदमाशों ने आवास का ग्रिल से लेकर दरवाजा तो चोरी कर बेच दिया, किंतु लालबाग की सुरक्षा में तैनात गार्डों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इसकी कई बार मौखिक सूचना प्राक्टर डा. रतन मंडल को भी दी गई, किंतु इस पर कोई सुध नहीं ली।


जर्जर क्वार्टर में बदमाशों की होती है अड्डेबाजी

परिसर में रहने वाले शिक्षकों ने बताया कि खाली क्वार्टर में स्थानीय कुछ असामाजिक तत्व जुआ खेलते हुए नशा करते हैं। उन्हें रोकने टोकने वाला कोई नहीं है। जब शिक्षक गार्ड को बदमाशों को खदेडऩे की बात कहते हैं तो वे भी भय के कारण बदमाशों से उलझना नहीं चाहते हैं। विवि प्रशासन भी ऐसे मामलों में रूचि नहीं लेती है।

अवैध तरीके से रखे जाते हैं लोग

असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ लूट की घटना के बाद पुलिस को जानकारी मिली कि एक संदिग्ध नौकरानी को एक शिक्षिका ने अवैध तरीके से क्वार्टर में जगह दी है। उस शिक्षका को कुलसचिव ने ऐसा करने के लिए चेतावनी भी दी थी। हालांकि शिक्षिका ने कहा था कि कई बार उसे खाली करने को कहा था, ङ्क्षकतु वह खाली नहीं कर रही है।

एक दर्जन से ज्यादा चोर रास्ते


परिसर में प्रवेश के लिए एक दर्जन से ज्यादा चोर रास्ते बने हुए हैं। जगह-जगह चाहरदीवारी टूटी हुई है। इसकी मरम्मती के लिए कई बार योजनाएं बनी, लेकिन फाइलों में ही निर्देश और योजनाएं बनती रही, ङ्क्षकतु स्थिति जस की तस बनी हुई है।

दिन भर मनचलों का लगा रहता आना-जाना

परिसर में दिन भर मनचलों का आना-जाना लगा रहता है। वे लहरियाकट स्टाइल में बाइक लेकर मुख्य द्वार से अंदर प्रवेश करते हैं और गल्र्स हास्टल के मुख्य रास्ते से बाइक लेकर वापस बाहर निकल जाते हैं। इस बीच कई बार छात्राएं छेडख़ानी की भी शिकार हुई हैं। इसकी शिकायत विवि प्रशासन को भी हुई है, ङ्क्षकतु उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।


टीएमबीयू की हर स्थिति पर नजर है। जो लोग जवाबदेही से भाग रहे हैं, उन्हें कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आवासीय परिसर और वहां रहने वाले शिक्षकों और छात्राओं की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं होगा। अगले हफ्ते आने के बाद पूरे मामले की समीक्षा के बाद कड़े निर्णय लिए जाएंगे।