अभी तक लालटेन ही राजद की पहचान थी, लेकिन अब टोपी, गमछा और झंडा भी जुड़ा

अभी तक लालटेन ही राजद की पहचान थी, लेकिन अब टोपी, गमछा और झंडा भी जुड़ा

अभी तक लालटेन ही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की पहचान थी, लेकिन अब इसमें टोपी, गमछा और झंडा भी जुड़ गया है। लालू यादव ने सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हरी टोपी पहनने और गले में हरा गमछा डालने को कहा है ताकि राजद कार्यकर्ताओं की ताकत दूर से ही दिखाई पड़ जाए। यही नहीं, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने हर कार्यकर्ता को घर पर झंडा लगाने को कह दिया है, ताकि पता चलेकि यहां राजद है। इनकी चली तो सड़कों और मोहल्लों में राजद अलग से ही दिखाई पड़ेगा।

लालू यादव भले ही दिल्ली में बेटी के घर में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हों, लेकिन पार्टी की अलग पहचान बनाने को लेकर वे इस समय बहुत गंभीर हैं। हरा रंग राजद की पहचान है। हरा गमछा तो कभी-कभार किसी के गले में दिख जाता है, लेकिन सिर खाली है। मंगलवार और बुधवार को पटना में हुए कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सभी से टोपी पहनने को कहा। लालू, उत्तर प्रदेश में सपा की टोपी से प्रभावित हैं। इसलिए उसका उदाहरण भी उन्होंने दिया कि सपा कार्यकर्ता टोपी के बूते किस तरह दूर से ही पहचाने जाते हैं। लालू को लगता है कि टोपी से एकजुटता बनाए रखने की ताकत मिलेगी। यह सही भी है कि सियासत में टोपी असरकारक है। टोपी, कभी कांग्रेस की भी पहचान थी। अभी भी पुराने कांग्रेसी टोपी पहने दिख जाते हैं। इसलिए राजद अगर टोपी पहन कर अलग दिखना चाहता है तो सोच को गलत भी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इस समय विधानसभा में 75 सीटों की हिस्सेदारी लेकर सबसे बड़ा दल राजद ही है और यह उसके समर्थकों के बूते ही संभव हो पाया है। उनमें टोपियों की बढ़ती संख्या विरोधियों के मनोबल पर प्रभाव डालेगी।


टोपी से समर्थकों की गणना का दांव बिहार में पहले भी खेला जा चुका है। यह 1988 की बात है जब कांग्रेस की सरकार थी। उस समय मुख्यमंत्री थे भागवत झा आजाद और विधानसभा अध्यक्ष थे शिवचंद्र झा, जो उन्हें हटाने पर तुले थे। तमाम विधायक भी मुख्यमंत्री के विरोध में थे, लेकिन उन्हें एक-दूसरे पर भरोसा नहीं था। तब तय हुआ कि मुख्यमंत्री विरोधी सदन में टोपी पहन कर आएंगे। हर दिन टोपियों की संख्या बढ़ने लगी। खेल पूरा होने से पहले इसकी भनक तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को लग गई। उन्होंने दोनों को हटा दिया। फिर सत्येंद्र नारायण सिन्हा सीएम बने और मोहम्मद हिदायतुल्लाह खान विधानसभा अध्यक्ष।


अब टोपी राजद की पहचान बन गई है। हालांकि इस हुंकारी का असर अभी दिखाई नहीं दिया है। कोई हरी टोपी अभी तक सार्वजनिक स्थान पर विचरती नजर नहीं आई, लेकिन हो सकता है कि आगे दिखाई दे। जब दिखाई देगी तब देखना दिलचस्प होगा, मुख्य विरोधी भाजपा का विरोध क्योंकि लोकसभा चुनाव में राजद के हरे झंडे पर रोक लगाने के लिए वह चुनाव आयोग तक पहुंच गई थी। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आयोग से आग्रह किया था कि यह रंग किसी खास धर्म व देश के प्रतीक के तौर पर है। इसको आयोग ने कोई तवज्जो नहीं दी थी, पर इस बार तो हरी टोपी और गमछा भी होगा।


राजद जहां इस तरह संगठन को एक करने में जुटा है, वहीं सहयोगी कांग्रेस पूरी तरह सन्नाटे में है। विधानसभा चुनाव में बुरी फजीहत के बाद भी संगठन ढीला पड़ा है। चुनाव में हारने के बाद बड़ी हवा चली कि पूरी तरह फेरबदल होगा, संगठन को मजबूत किया जाएगा, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। धार देने के लिए राहुल गांधी ने सात जुलाई को यहां के नेताओं को बुलाया था और कहा था कि नेता, गांवों में जाएं और रात बिताएं। तीन महीने बाद फिर बुलाने को कहकर सबको विदा किया था। ढाई महीने पार हो गए हैं और गांव तो दूर अभी तक कोई घर से नहीं निकला।


इसके बावजूद दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में एक सीट पर वह दावा ठोके हैं, क्योंकि एक पर वह पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर थी जबकि दूसरी सीट पर राजद नंबर दो था। ये सीटें एनडीए व महागठबंधन दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। राजद दोनों सीटें खुद लड़ना चाहता है ताकि विपक्ष 115 से बढ़ाकर 117 हो जाए। ऐसे में बहुमत के लिए सिर्फ पांच की कमी होगी। एक निर्दलीय के अलावा चार-चार सीटों वाले हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और विकासशील इंसान पार्टी में से किसी एक के एनडीए से इधर-उधर होने पर विपक्ष की पौ बारह संभव है। फिलहाल तो यही लग रहा है कि उप चुनाव की दोनों सीटों पर दावा करके राजद सबसे पहले कांग्रेस को ही टोपी पहना देना चाह रहा है।


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तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) प्रशासन लालबाग आवासीय परिसर की सुरक्षा को लेकर उदासीन बना हुआ है। नौ अक्टूबर की रात पीजी इतिहास विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डा. राधिक मिश्रा से लूट के बाद भी लालबाग की सुरक्षा ताक पर है। 13 दिन बीत जाने के बाद भी सुरक्षा को लेकर कोई ठोस इंतजाम नहीं किया गया है। इस कारण दोबारा किसी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है। परिसर के सुरक्षा फाइलों में हो रही है।


प्रवेश द्वार पर बेरोकटोक आवाजाही

घटना के इतने दिन बाद कई बार अधिकारियों ने परिसर का निरीक्षण किया। मुख्य द्वार पर 24 घंटे अलग-अलग शिफ्ट में गार्ड के तैनाती की बात हुई। दो दिनों तक गार्ड की मौजूदगी रही, लेकिन स्थिति फिर जस की तस हो गई है। मुख्य द्वार लोगों का बेरोकटोक आना जाना लगा हुआ है।

क्वार्टर का ग्रिल और गेट तक बदमाशों ने बेच डाला

लालबाग के क्वार्टर नंबर 19 की बुरी हालत है। एक शिक्षक के क्वार्टर खाली करने के बाद बदमाशों ने आवास का ग्रिल से लेकर दरवाजा तो चोरी कर बेच दिया, किंतु लालबाग की सुरक्षा में तैनात गार्डों को इसकी भनक तक नहीं लगी। इसकी कई बार मौखिक सूचना प्राक्टर डा. रतन मंडल को भी दी गई, किंतु इस पर कोई सुध नहीं ली।


जर्जर क्वार्टर में बदमाशों की होती है अड्डेबाजी

परिसर में रहने वाले शिक्षकों ने बताया कि खाली क्वार्टर में स्थानीय कुछ असामाजिक तत्व जुआ खेलते हुए नशा करते हैं। उन्हें रोकने टोकने वाला कोई नहीं है। जब शिक्षक गार्ड को बदमाशों को खदेडऩे की बात कहते हैं तो वे भी भय के कारण बदमाशों से उलझना नहीं चाहते हैं। विवि प्रशासन भी ऐसे मामलों में रूचि नहीं लेती है।

अवैध तरीके से रखे जाते हैं लोग

असिस्टेंट प्रोफेसर के साथ लूट की घटना के बाद पुलिस को जानकारी मिली कि एक संदिग्ध नौकरानी को एक शिक्षिका ने अवैध तरीके से क्वार्टर में जगह दी है। उस शिक्षका को कुलसचिव ने ऐसा करने के लिए चेतावनी भी दी थी। हालांकि शिक्षिका ने कहा था कि कई बार उसे खाली करने को कहा था, ङ्क्षकतु वह खाली नहीं कर रही है।

एक दर्जन से ज्यादा चोर रास्ते


परिसर में प्रवेश के लिए एक दर्जन से ज्यादा चोर रास्ते बने हुए हैं। जगह-जगह चाहरदीवारी टूटी हुई है। इसकी मरम्मती के लिए कई बार योजनाएं बनी, लेकिन फाइलों में ही निर्देश और योजनाएं बनती रही, ङ्क्षकतु स्थिति जस की तस बनी हुई है।

दिन भर मनचलों का लगा रहता आना-जाना

परिसर में दिन भर मनचलों का आना-जाना लगा रहता है। वे लहरियाकट स्टाइल में बाइक लेकर मुख्य द्वार से अंदर प्रवेश करते हैं और गल्र्स हास्टल के मुख्य रास्ते से बाइक लेकर वापस बाहर निकल जाते हैं। इस बीच कई बार छात्राएं छेडख़ानी की भी शिकार हुई हैं। इसकी शिकायत विवि प्रशासन को भी हुई है, ङ्क्षकतु उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।


टीएमबीयू की हर स्थिति पर नजर है। जो लोग जवाबदेही से भाग रहे हैं, उन्हें कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आवासीय परिसर और वहां रहने वाले शिक्षकों और छात्राओं की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं होगा। अगले हफ्ते आने के बाद पूरे मामले की समीक्षा के बाद कड़े निर्णय लिए जाएंगे।