बिहार में शिक्षकों के तबादले की तैयारी, जुलाई के पहले सप्ताह में जारी होगा शेड्यूल

बिहार में शिक्षकों के तबादले की तैयारी, जुलाई के पहले सप्ताह में जारी होगा शेड्यूल

 प्रदेश के शिक्षकों, महिला एवं दिव्यांग शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के ऐच्छिक तबादले को लेकर शिक्षा विभाग की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। तबादले के लिए आनलाइन आवेदन की प्रक्रिया हेतु एनआइसी के सहयोग से तैयार पोर्टल का मंगलवार को फाइनल ट्रायल देखा गया। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार के मुताबिक, शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया कब से आरंभ हो, इसको लेकर तैयारी चल रही है। शिक्षा विभाग के पोर्टल के माध्यम से आनलाइन आवेदन लिए जाएंगे और साफ्टवेयर के माध्यम से इच्छुक शिक्षकों के तबादले सुनिश्चित होंगे।

पहले महिला एवं दिव्यांग शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के तबादले होंगे। महिला एवं दिव्यांग शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के अंतर नियोजन इकाई एवं अंतरजिला तबादले तथा पुरुष शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों के पारस्परिकअंतर नियोजन इकाई व अंतर जिला तबादले के प्रविधान नियमावली में किए गए हैं। 

तबादले से जुड़ी यह बातें भी जानें


- ट्रांसफर के लिए महिला एवं दिव्यांग शिक्षकों से लिए जाएंगे आनलाइन आवेदन

- शिक्षा विभाग में एनआइसी की मदद से तैयार पोर्टल पर करने होंगे आवेदन

ऐसे शिक्षक हो जाएंगे तबादले से वंचित

यह जानकारी पहले दी जा चुकी है कि तीन वर्ष से कम की सेवा वाले महिला एवं दिव्यांग शिक्षक तथा पुस्तकालयाध्यक्ष ऐच्छिक तबादले के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। उन महिला एवं दिव्यांग शिक्षकों तथा पुस्तकालयाध्यक्षों को भी तबादले का लाभ नहीं मिलेगा, जिनके प्रमाण-पत्रों की जांच नहीं हुई है। जिनके प्रमाण-पत्र जांच में सही पाए गए हों, वे ही आवेदन करने के पात्र होंगे।


प्रशिक्षित न होने वाले भी नहीं ले पाएंगे फायदा


इसी प्रकार आनुशासनिक कार्रवाई के अधीन या निलंबित महिला एवं दिव्यांग शिक्षक और पुस्तकालयाध्यक्ष भी आवेदन नहीं कर पाएंगे। वैसे महिला एवं दिव्यांग शिक्षक भी तबादले के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे, जो प्रशिक्षित नहीं हैं। ट्रायल के दौरान प्राथमिक शिक्षा निदेशक डा. रणजीत कुमार सिंह और माध्यमिक शिक्षा निदेशक गिरिवर दयाल सिंह भी मौजूद थे। 

पोर्टल का फाइनल ट्रायल देखा गया है

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार ने कहा कि पंचायती राज एवं नगर निकायों के शिक्षकों, महिला एवं दिव्यांग शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के ऐच्छिक तबादले के लिए पोर्टल का फाइनल ट्रायल देखा गया है। सब कुछ ठीक है। महिला व दिव्यांग शिक्षकों के आवेदन पोर्टल के माध्यम से आनलाइन लिए जाएंगे। इसके लिए विभाग की ओर से जुलाई के पहले सप्ताह में शेड्यूल जारी किया जाएगा।


डोभी-चतरा सड़क हादसे में आश्रितों को चेक देने पहुंचे अधिकारियों का हुआ झेलना पड़ा विरोध

डोभी-चतरा सड़क हादसे में आश्रितों को चेक देने पहुंचे अधिकारियों का हुआ झेलना पड़ा विरोध

गया जिले के अंतर्गत डोभी चतरा सड़क में 23 जुलाई को इनोवा और डंपर के बीच आमने-सामने हुई टक्कर में मौत के मुंह में समा गए गुरारू प्रखंड के तीन युवकों के आश्रितों को सरकारी सहायता राशि का चेक देने बुधवार को पीड़ितों के घर पहुंचे अधिकारियों का लोगों ने काफी देर से घटना के पांच दिन बाद आने के कारण जमकर विरोध किया। पीड़ित परिवारों ने उक्त अधिकारियों के हाथ से सहायता राशि का चेक लेने से इनकार कर दिया । जिससे अधिकारियों को बैरंग वापस लौटना पड़ा।

उक्त हादसे में कार में सवार सात युवकों की मौत हो गई थी। घटना में जान गंवाने वाले लोगों में गुरारु प्रख़ंड के तीन युवक गुरारु बाजार का पंकज कुमार उर्फ पूजा यादव, वरोरह गांव का संदीप यादव व कजरैला गांव का रामचंद्र यादव शामिल था। लेकिन, हादसे के पांच दिन बीत जाने के बाद भी सरकार द्वारा अनुमान्य व प्रखंड प्रशासन की ओर से मिलने वाली पारिवारिक लाभ योजना के तहत 20 हजार व कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत तीन हजार रुपये की सहायता राशि मृतकों के आश्रितों को नहीं मिली।


बुधवार को दैनिक जागरण में प्रशासन की इस लापरवाही को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। जिसके बाद प्रशासन की टीम हरकत में आ गई। गुरारु के नवपदस्थापित सीओ संजीव कुमार त्रिवेदी व पुलिस पदाधिकारी छेदीलाल चौधरी ने वरोरह गांव पहूंच कर मृतक संदीप यादव के पिता शिव विजय यादव व कजरैला गांव पहूंच कर मृतक रामचंद्र यादय के भाई सह युवा राजद के प्रखंड अध्थक्ष बालेश्वर यादव से मिले।

अधिकारियों ने उक्त लोगों से पारिवारिक लाभ योजना की 20 हजार रुपये की सहायता राशि का चेक लेने के लिए कहा। लेकिन पीड़ित, प्रशासन पर सहायता राशि देने में देरी करने व.बीडीओ के नहीं आने से नाराजगी की बात कह कर चेक लेने से इनकार कर दिया। जिसके बाद उक्त अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को समझाने का काफी प्रयास किया। अंततः उन्हें वापस लौटना पड़ा ।